29/05/2026 by SarkariTeaching.com
भारत की नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि देश की सभ्यता, कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा भी हैं। हिमालय से निकलने वाली विशाल नदियों से लेकर प्रायद्वीपीय भारत की नदियों तक, प्रत्येक नदी का अपना महत्व है। इन नदियों के बहाव की दिशा और समुद्र में मिलने की व्यवस्था को अपवाह तंत्र (Drainage System) कहा जाता है। भारत का अपवाह तंत्र देश की भौगोलिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत का अपवाह तंत्र मुख्यतः दो भागों में विभाजित है—हिमालयी नदी तंत्र और प्रायद्वीपीय नदी तंत्र। हिमालयी नदियाँ जैसे गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र बारहमासी होती हैं क्योंकि इन्हें हिमनदों और वर्षा दोनों से जल प्राप्त होता है। प्रायद्वीपीय नदियाँ जैसे गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और नर्मदा मुख्यतः वर्षा पर निर्भर करती हैं। अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती अरब सागर में मिलती हैं। भारत की कृषि, जल परिवहन और सिंचाई व्यवस्था में इन नदियों का महत्वपूर्ण योगदान है।