16/10/2026 by SarkariTeaching.com
भारतीय संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है। यह भारत की शासन व्यवस्था को संचालित करने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और देश में न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व स्थापित करने का आधार है। भारतीय संविधान भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाता है और प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।
भारतीय संविधान का निर्माण
भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर को संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में समिति ने संविधान का प्रारूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इसी दिन भारत एक गणराज्य बना। इसलिए प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है।
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ
1. विश्व के सबसे विस्तृत संविधानों में से एक: भारतीय संविधान में शासन व्यवस्था, नागरिक अधिकारों, केंद्र और राज्यों के संबंधों तथा विभिन्न संस्थाओं के कार्यों का विस्तृत वर्णन है।
2. लोकतांत्रिक व्यवस्था: भारत में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है। सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है।
3. मौलिक अधिकार: संविधान नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध सुरक्षा, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है।
4. मौलिक कर्तव्य: नागरिकों से संविधान का सम्मान करने, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करने, देश की एकता बनाए रखने तथा पर्यावरण की रक्षा करने जैसे कर्तव्यों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
5. धर्मनिरपेक्षता: भारत में सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक संरक्षण है।
6. स्वतंत्र न्यायपालिका: न्यायपालिका संविधान की व्याख्या करती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना का महत्व
संविधान की प्रस्तावना उसके मूल आदर्शों और उद्देश्यों को स्पष्ट करती है। इसमें भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित किया गया है। प्रस्तावना सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्रदान करने का संकल्प व्यक्त करती है।
यह प्रस्तावना हमें याद दिलाती है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है।
भारतीय संविधान और नागरिकों की भूमिका
संविधान केवल सरकार के लिए नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें कानून का पालन करना चाहिए, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, मतदान में भाग लेना चाहिए और समाज में समानता तथा सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए।
संविधान के अधिकारों के साथ-साथ हमारे कर्तव्य भी महत्वपूर्ण हैं। जब नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हैं, तब लोकतंत्र अधिक मजबूत बनता है।

1. संविधान सभा (Constituent Assembly)
- सर्वप्रथम मांग: भारत में सबसे पहले मौखिक रूप से संविधान सभा की मांग 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने की थी।
- लिखित विचार: वर्ष 1934 में लिखित रूप में संविधान सभा का विचार मानवेन्द्र नाथ राय (M.N. Roy) ने दिया था।
- गठन: जुलाई 1946 में कैबिनेट मिशन की संस्तुति (सिफारिश) पर भारतीय संविधान सभा का गठन किया गया।
- सदस्य संख्या: संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें:
- 292 ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि
- 4 चीफ कमिश्नरी प्रांतों के प्रतिनिधि
- 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे।
- प्रथम बैठक: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई। इसकी अध्यक्षता (अस्थायी अध्यक्ष) डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा ने की थी।
- स्थायी अध्यक्ष: 11 दिसम्बर 1946 की बैठक में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया।
- राष्ट्रीय ध्वज: 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) को अपनाया था।
- प्रारूप समिति (Drafting Committee): डॉ. भीम राव अम्बेडकर की अध्यक्षता में 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति का गठन किया गया। इस समिति में कुल सदस्यों की संख्या 7 थी।
- संवैधानिक सलाहकार: बी.एन. राव संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
- विभाजन के पश्चात: देश के विभाजन के बाद 31 अक्टूबर 1947 को संविधान सभा का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद सभा में कुल सदस्यों की संख्या 299 रह गई।
- वाचन व समय: संविधान का वाचन 3 चरणों में 114 दिनों तक हुआ था। इसके निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन का समय लगा था।
- महिला सदस्य: संविधान सभा में कुल महिला सदस्यों की संख्या 15 थी।
- अंगीकार एवं लागू: 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान अंगीकार (Adopt) किया गया तथा 26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण रूप से लागू किया गया।
- विशेष तथ्य: वर्ष 2015 से हर साल 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
- मूल बनाम वर्तमान संविधान: मूल संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं। वर्तमान में अनुसूचियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
प्रारूप समिति के सदस्य (Members of Drafting Committee)
- डॉ. भीम राव अम्बेडकर (अध्यक्ष)
- अल्लादि कृष्णा स्वामी अय्यर
- डॉ. के.एम. मुंशी
- मोहम्मद सादुल्ला
- गोपालस्वामी आयंगर
- एन. माधव राव (बी.एल. मित्र के स्थान पर)
- टी.टी. कृष्णमाचारी (डी.पी. खेतान की मृत्यु के पश्चात)
संविधान सभा की प्रमुख समितियां एवं उनके अध्यक्ष
| समिति | अध्यक्ष |
|---|---|
| संघ संविधान समिति | पं. जवाहर लाल नेहरू |
| संघ शक्ति समिति | पं. जवाहर लाल नेहरू |
| संचालन समिति | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| झंडा समिति | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| प्रारूप समिति | डॉ. भीम राव अम्बेडकर |
| प्रांतीय संविधान समिति | सरदार वल्लभ भाई पटेल |
| मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक परामर्श समिति | सरदार वल्लभ भाई पटेल |
| मौलिक अधिकार उपसमिति | जे.बी. कृपलानी |
| अल्पसंख्यक परामर्श उपसमिति | एच.सी. मुखर्जी |
2. संविधान के भाग (Parts of the Constitution)
| भाग | विषय (Content) | अनुच्छेद (Articles) |
|---|---|---|
| भाग I | संघ और उसका राज्य क्षेत्र | अनुच्छेद 1-4 |
| भाग II | नागरिकता | अनुच्छेद 5-11 |
| भाग III | मूल अधिकार | अनुच्छेद 12-35 |
| भाग IV | राज्य के नीति निदेशक तत्व | अनुच्छेद 36-51 |
| भाग | विषय | अनुच्छेद |
|---|---|---|
| भाग IVA | मूल कर्तव्य | अनुच्छेद 51A |
| भाग V | संघ सरकार | अनुच्छेद 52-151 |
| भाग VI | राज्य सरकार | अनुच्छेद 152-237 |
| भाग VII | निरसन (हटाया गया) | अनुच्छेद 238 |
| भाग VIII | केंद्र शासित प्रदेश | अनुच्छेद 239-242 |
| भाग IX | पंचायत | अनुच्छेद 243- 243O |
| भाग IXA | नगरपालिकाएं | अनुच्छेद 243P-243ZG |
| भाग IXB | सहकारी संस्थाएं | अनुच्छेद 243ZH-243ZT |
| भाग X | अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र | अनुच्छेद 244-244A |
| भाग XI | संघ और राज्यों के बीच संबंध | अनुच्छेद 245-263 |
| भाग XII | वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद | अनुच्छेद 264-300A |
| भाग XIII | वाणिज्य और व्यापार | अनुच्छेद 301-307 |
| भाग XIV | संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं | अनुच्छेद 308-323 |
| भाग XIVA | अधिकरण | अनुच्छेद 323A-323B |
| भाग XV | निर्वाचन | अनुच्छेद 324-329A |
| भाग XVI | कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबंध | अनुच्छेद 330-342 |
| भाग XVII | राजभाषा | अनुच्छेद 343-351 |
| भाग XVIII | आपातकालीन प्रावधान | अनुच्छेद 352-360 |
| भाग XIX | प्रकीर्ण | अनुच्छेद 361-367 |
| भाग XX | संविधान संशोधन | अनुच्छेद 368 |
| भाग XXI | अस्थायी संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध | अनुच्छेद 369-392 |
| भाग XXII | संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन | अनुच्छेद 393-395 |
3. संविधान की अनुसूचियां (Schedules)
- मूल संविधान: मूल रूप से संविधान में 8 अनुसूचियां थीं।
- वर्तमान संख्या: संविधान संशोधनों के बाद अब इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
- संशोधन इतिहास:
- 9वीं अनुसूची: प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ी गई।
- 10वीं अनुसूची: 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ी गई।
- 11वीं अनुसूची: 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई।
- 12वीं अनुसूची: 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ी गई।
अनुसूचियों की सूची और संबंधित विषय
- प्रथम अनुसूची: भारत संघ के राज्य एवं संघशासित क्षेत्र।
- द्वितीय अनुसूची: विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि) के वेतन, भत्ते और पेंशन।
- तृतीय अनुसूची: विभिन्न पदाधिकारियों के शपथ और प्रतिज्ञान।
- चौथी अनुसूची: विभिन्न राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों का राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण।
- पांचवीं अनुसूची: विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन और नियंत्रण।
- छठी अनुसूची: असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन।
- सातवीं अनुसूची: केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों का बंटवारा (संघ, राज्य और समवर्ती सूची)।
- आठवीं अनुसूची: 22 संवैधानिक भाषाएं।
- नवी अनुसूची: भूमि सुधार कानून।
- दसवीं अनुसूची: दल-बदल कानून (Anti-defection law)।
- ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायती राज संस्थाओं के कार्य, शक्तियां तथा कर्तव्य (29 विषय)।
- बारहवीं अनुसूची: शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं) के कार्य, शक्तियां तथा कर्तव्य (18 विषय)।
4. संविधान के स्रोत (Sources of Indian Constitution)
- सबसे बड़ा स्रोत: भारतीय संविधान का सबसे प्रमुख ढांचागत स्रोत भारत शासन अधिनियम, 1935 है।
विदेशी देशों से लिए गए प्रावधान
- ब्रिटेन: एकल नागरिकता, विधि का शासन, विधि के समक्ष समता, संसदात्मक शासन व्यवस्था, द्विसदनीय व्यवस्था, रिट शक्तियां, महान्यायवादी का पद, बजट।
- अमेरिका: मौलिक अधिकार, प्रस्तावना, विधि का समान संरक्षण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनरावलोकन, राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया।
- आयरलैंड: राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP), राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया, राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन।
- ऑस्ट्रेलिया: समवर्ती सूची, प्रस्तावना की भाषा, केंद्र व राज्य के बीच संबंध, संयुक्त बैठक।
- कनाडा: संघात्मक शासन व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियां केंद्र में निहित होना, राज्यपाल की नियुक्ति।
- फ्रांस: गणतंत्रात्मक शासन व्यवस्था, प्रस्तावना में वर्णित स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व का विचार।
- दक्षिण अफ्रीका: संविधान संशोधन प्रक्रिया, राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन।
- जर्मनी: मौलिक अधिकारों के निलंबन से संबंधित आपातकालीन प्रावधान (मूलभूत प्रावधान)।
- रूस: मौलिक कर्तव्य, प्रस्तावना में वर्णित न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक)।
- जापान: विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
5. संविधान की उद्देशिका / प्रस्तावना (Preamble)
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- प्रस्तावना को संविधान की कुंजी कहा जाता है।
- पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा 13 दिसम्बर 1946 को प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव को ही संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को उद्देशिका के रूप में स्वीकार किया गया।
- ठाकुर दास भार्गव ने प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा था।
- 42वां संविधान संशोधन (1976): इसके द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए: समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता।
6. संघ एवं इसका क्षेत्र (Union and its Territory)
- संवैधानिक प्रावधान: संविधान के भाग I के अंतर्गत अनुच्छेद 1 से 4 तक में इसका वर्णन है।
- अनुच्छेद 1: इसमें कहा गया है कि ‘इंडिया अर्थात भारत, राज्यों का संघ (Union of States) होगा’।
- अनुच्छेद 2 व 3: संसद को कानून बनाकर नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, राज्यों के नाम, सीमाओं में परिवर्तन या राज्यों के पुनर्गठन का अधिकार देते हैं।
- भाषाई आधार पर आयोग: राज्यों के गठन हेतु वर्ष 1948 में धर आयोग एवं JVP समिति का गठन किया गया था, परंतु इन्होंने भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की मांग को अस्वीकार कर दिया था।
- पहला भाषाई राज्य: वर्ष 1953 में पोट्टी श्री रामुलु के आंदोलन (आमरण अनशन) के पश्चात भाषाई आधार पर गठित होने वाला आंध्र प्रदेश पहला राज्य बना।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (1953): फजल अली की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय आयोग की सिफारिशों पर 1 नवम्बर 1956 को 14 राज्य तथा 6 केंद्रशासित प्रदेशों का गठन किया गया था।
- विशेष परिवर्तन (1973): लकादीव-मिनिकाय-अमीनीदीवी द्वीप समूह का नाम बदलकर लक्षद्वीप किया गया।
1956 के पश्चात् गठित नवीन राज्य
| वर्ष | नवीन राज्य | किस राज्य / केंद्रशासित प्रदेश से पृथक हुआ |
|---|---|---|
| 1 मई 1960 | गुजरात | महाराष्ट्र (बॉम्बे) |
| 1 दिसंबर 1963 | नागालैंड | असम |
| 1 नवंबर 1966 | हरियाणा | पंजाब |
| 25 जनवरी 1971 | हिमाचल प्रदेश (18वां) | हिमाचल प्रदेश (पहले संघ राज्य क्षेत्र था) |
| 21 जनवरी 1972 | मणिपुर | मणिपुर (पहले संघ राज्य क्षेत्र था) |
| 21 जनवरी 1972 | त्रिपुरा | त्रिपुरा (पहले संघ राज्य क्षेत्र था) |
| 21 जनवरी 1972 | मेघालय | असम |
- 16 मई 1975: सिक्किम (22वां राज्य) – पहले सहराज्य था।
- 20 फरवरी 1987: मिजोरम – पहले संघ राज्य क्षेत्र (UT) था।
- 20 फरवरी 1987: अरुणाचल प्रदेश – पहले संघ राज्य क्षेत्र (UT) था।
- 30 मई 1987: गोवा (25वां राज्य) – पहले संघ राज्य क्षेत्र था।
- 1 नवंबर 2000: छत्तीसगढ़ – मध्य प्रदेश से पृथक होकर बना।
- 9 नवंबर 2000: उत्तराखंड – उत्तर प्रदेश से पृथक होकर बना।
- 15 नवंबर 2000: झारखंड – बिहार से पृथक होकर बना।
- 2 जून 2014: तेलंगाना (29वां राज्य) – आंध्र प्रदेश से पृथक होकर बना।
केंद्रशासित प्रदेशों का गठन (Union Territories)
- 1 नवंबर 1956: दिल्ली, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह।
- 16 अगस्त 1962: पुडुचेरी।
- 1 नवंबर 1966: चंडीगढ़।
- 31 अक्टूबर 2019: जम्मू व कश्मीर तथा लद्दाख (राज्य पुनर्गठन के बाद)।
- 26 जनवरी 2020: दादरा व नगर हवेली और दमन व दीव (दोनों का विलय कर एक UT बनाया गया)।
2. नागरिकता (Citizenship – भाग II)
- अनुच्छेद सीमा: अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता की चर्चा है।
- प्रकृति: भारतीय संविधान में एकल नागरिकता (Single Citizenship) का प्रावधान है, जिसका स्रोत ब्रिटेन का संविधान है।
- संसदीय शक्ति: अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के संदर्भ में कानून बनाने का अधिकार है।
- नागरिकता अधिनियम: संसद ने वर्ष 1955 में व्यापक भारतीय नागरिकता अधिनियम बनाया। इसके तहत नागरिकता प्राप्ति के 5 तरीके और नागरिकता समाप्ति के 3 तरीकों का उल्लेख किया गया है।
3. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights – भाग III)
- उपनाम व स्रोत: इसे संविधान का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। यह अमेरिका के संविधान से प्रेरित है।
- प्रकृति: मौलिक अधिकार राज्यों के विरुद्ध प्राप्त होते हैं तथा न्यायालय में प्रवर्तनीय (Justiciable/वाद योग्य) हैं।
- संख्या परिवर्तन: मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 31) को समाप्त कर भाग-XII के अनुच्छेद 300(A) के तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में कुल 6 मौलिक अधिकार हैं:
1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
- अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता (विधि के समक्ष समता या विधि का समान संरक्षण)।
- अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, नस्ल, रंग, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
- अनुच्छेद 16: लोक नियोजन (सरकारी नौकरियों) में अवसर की समानता।
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता (छुआछूत) का उन्मूलन।
- अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत।
2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
- अनुच्छेद 19: इसके अंतर्गत नागरिकों को 6 प्रकार की स्वतंत्रता दी गई है। मुख्य रूप से वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता [19(1)(a)] शामिल है, जिसके अंतर्गत ही प्रेस की स्वतंत्रता निहित है।
- अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 21: प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (Right to Life)। इसी के तहत निजता का अधिकार (Privacy), जीवनसाथी चुनने का अधिकार, भोजन और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है।
- नोट: अनुच्छेद 20 तथा 21 को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी किसी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता।
- अनुच्छेद 21(A): 6 से 14 वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का अधिकार। इसे 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 22: कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण (गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर यात्रा का समय छोड़कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य)।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
- अनुच्छेद 23: मानव के दुर्व्यापार (तस्करी), बालश्रम (Forced Labour), बंधुआ मजदूरी और बेगारी पर प्रतिबंध।
- अनुच्छेद 24: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को जोखिम वाले कामों/नियोजन पर रखने पर प्रतिबंध।
4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
- अनुच्छेद 25: अंतःकरण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण व प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- विशेष: अनुच्छेद 25(2): सिखों को कृपाण धारण करने की धार्मिक स्वतंत्रता देता है।
5. संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
- यह अधिकार केवल भारतीय अल्पसंख्यकों को प्राप्त है।
- अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक वर्गों के हितों, लिपि, भाषा व संस्कृति का संरक्षण।
- अनुच्छेद 30: अल्पसंख्यक वर्गों को शिक्षण संस्थानों की स्थापना और उनके संचालन का अधिकार।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
- अनुच्छेद 32: मौलिक अधिकारों के हनन पर नागरिकों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) जाने का अधिकार देता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का हृदय एवं आत्मा कहा था।
- अनुच्छेद 226: इसके तहत उच्च न्यायालय (High Court) को भी मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- रिट के प्रकार: न्यायालय मुख्य रूप से 5 प्रकार की रिट जारी कर सकता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari), और अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)।
4. राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP – भाग IV)
- विवरण व स्रोत: अनुच्छेद 36 से 51 तक इसका वर्णन है। यह आयरलैंड के संविधान से लिया गया है।
- उद्देश्य: भारत में एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना।
- प्रकृति: यह राज्यों के विरुद्ध नहीं है (राज्यों के कर्तव्य हैं) तथा अनुच्छेद 37 के अनुसार न्यायालय में प्रवर्तनीय (वाद योग्य) नहीं है।
प्रमुख अनुच्छेद (39 से 51)
- अनुच्छेद 39: सभी नागरिकों के लिए आजीविका के पर्याप्त साधन और स्त्री-पुरुषों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन।
- अनुच्छेद 39(A): समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता (42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया)।
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन/गठन।
- अनुच्छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएं तथा महिला प्रसूति सहायता (Maternity Relief) का उपबंध।
- अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए न्यूनतम मजदूरी (निर्वाह मजदूरी) और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 44: पूरे देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने का प्रयास।
- अनुच्छेद 45: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की बाल्यावस्था देख-रेख और शिक्षा का प्रबंध।
- अनुच्छेद 46: SC, ST तथा अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा और आर्थिक हितों में वृद्धि।
- अनुच्छेद 47: लोगों के पोषाहार स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य को सुधारने का राज्य का कर्तव्य (शराबबंदी आदि इसी के तहत है)।
- अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बढ़ावा देना तथा दुधारू पशुओं की बलि पर रोक।
- अनुच्छेद 48(A): पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन और वन व वन्य जीवों की रक्षा (42वें संशोधन, 1976 द्वारा)।
- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण।
- अनुच्छेद 50: कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण।
- अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
5. मूल कर्तव्य (Fundamental Duties – भाग IVA)
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 51(A) के तहत मौलिक कर्तव्य जोड़े गए, जिनका स्रोत रूस (पूर्व सोवियत संघ) का संविधान है।
- समिति: सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इन्हें जोड़ा गया।
- संख्या: प्रारंभ में मूल कर्तव्यों की संख्या 10 थी। वर्तमान में इनकी संख्या 11 है।
- 11वां मूल कर्तव्य: इसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के तहत जोड़ा गया (माता-पिता का कर्तव्य है कि 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें)।
6. संघीय कार्यपालिका (Union Executive – भाग V)
राष्ट्रपति (President)
- स्थिति: राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है।
- चुनाव: इनका निर्वाचन एक अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली द्वारा होता है, जिसमें एक निर्वाचक मंडल भाग लेता है।
- निर्वाचक मंडल के सदस्य: लोकसभा तथा राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य, सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा दिल्ली और पुडुचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
- योग्यता: भारत का नागरिक हो, न्यूनतम आयु 35 वर्ष हो और लोकसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।
| राष्ट्रपति एक नजर में | विवरण |
|---|---|
| पद का उल्लेख | अनुच्छेद 52 |
| शपथ | भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष |
| इस्तीफा | उपराष्ट्रपति को |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (शपथ ग्रहण की तिथि से) |
| न्यूनतम आयु | 35 वर्ष |
| वर्तमान वेतन | ₹ 5 लाख प्रति माह |
राष्ट्रपति के कार्य एवं शक्तियां
- नियुक्तियां: प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रीपरिषद के मंत्री, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के न्यायाधीश, राज्यपाल, महान्यायवादी (AGI), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) आदि की नियुक्ति।
- सेना प्रमुख: राष्ट्रपति तीनों सेनाओं (थल, नभ, जल) का सर्वोच्च प्रधान/अध्यक्ष होता है।
- क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72): न्यायालय द्वारा दी गई किसी भी सजा या मृत्युदंड को क्षमा/कम करने की शक्ति।
- संसद सत्र व विघटन: अनुच्छेद 85 के तहत संसद सत्र को आहूत करने, सत्रावसान करने और लोकसभा को भंग करने की शक्ति।
- संयुक्त अधिवेशन (अनुच्छेद 108): संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने का अधिकार (जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है)।
- वीटो पावर (अनुच्छेद 111): विधेयकों पर वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति, जो तीन प्रकार की होती है: आत्यन्तिक, निलम्बनकारी और जेबी (पॉकेट) वीटो।
- अध्यादेश (अनुच्छेद 123): संसद सत्र न चलने की स्थिति में अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
- सुप्रीम कोर्ट से परामर्श (अनुच्छेद 143): किसी कानूनी मामले पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की शक्ति।
- वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): प्रत्येक 5वें वर्ष में वित्त आयोग का गठन करना।
- आपातकालीन शक्तियां:
- अनुच्छेद 352: राष्ट्रीय आपातकाल (युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह)।
- अनुच्छेद 356: राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन।
- अनुच्छेद 360: वित्तीय आपातकाल।
- महाभियोग प्रक्रिया (अनुच्छेद 61): राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया को महाभियोग कहा जाता है, जो अमेरिका के संविधान से ली गई है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
उपराष्ट्रपति (Vice-President)
- पद का उल्लेख: अनुच्छेद 63 के तहत भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा (स्रोत: अमेरिका)।
- चुनाव व योग्यता: अप्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित + मनोनीत) के निर्वाचक मंडल द्वारा। न्यूनतम आयु 35 वर्ष और राज्यसभा सदस्य बनने की योग्यता हो।
- कार्य: उपराष्ट्रपति, राज्यसभा का पदेन सभापति होता है (अनुच्छेद 64)। राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर वह अधिकतम 6 माह तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
| उपराष्ट्रपति एक नजर में | विवरण |
|---|---|
| पद का उल्लेख | अनुच्छेद 63 |
| शपथ | राष्ट्रपति के समक्ष |
| इस्तीफा | राष्ट्रपति को |
| कार्यकाल | 5 वर्ष |
| न्यूनतम आयु | 35 वर्ष |
7. केंद्रीय मंत्रीपरिषद एवं प्रधानमंत्री (अनुच्छेद 74-75)
- अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए एक मंत्रीपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा।
- अनुच्छेद 75: प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करेगा। मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
- मंत्रीपरिषद का उत्तरदायित्व: मंत्रीपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
- मंत्रियों की श्रेणियां: मंत्रीपरिषद में 3 स्तर के मंत्री होते हैं—कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री।
- संख्या सीमा: मंत्रीपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती (91वां संशोधन)।
- प्रधानमंत्री की शक्तियां: संघीय कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख, नीति आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद का पदेन अध्यक्ष। न्यूनतम आयु 25 वर्ष (यदि लोकसभा सदस्य हो)।
8. महान्यायवादी (Attorney General of India – अनुच्छेद 76)
- संवैधानिक पद: अनुच्छेद 76 के तहत संघीय मंत्रीपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति।
- भूमिका: यह देश का सर्वोच्च कानूनी सलाहकार (First Law Officer) होता है। इसे भारत के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
- संसदीय विशेषाधिकार: यह संसद का सदस्य नहीं होता, फिर भी संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है, बोल सकता है, परंतु मत (Vote) देने का अधिकार नहीं होता (अनुच्छेद 88)।
- कार्यकाल: राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत।
- प्रथम महान्यायवादी: एम.सी. सीतलवाड़।
9. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG – अनुच्छेद 148-151)
- उद्देश्य व स्रोत: भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत विकसित। अनुच्छेद 148 के तहत राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति।
- भूमिका: यह देश के सार्वजनिक धन/लोक वित्त का मुख्य संरक्षक होता है। यह अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे लोक लेखा समिति (PAC) जांचती है। इसलिए सीएजी को लोक लेखा समिति का ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ कहा जाता है।
- कार्यकाल: 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले पूरा हो)। इन्हें पद से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की भांति ही संसद द्वारा हटाया जा सकता है।
- प्रथम सीएजी (CAG): नरहरि राव थे।
10. संघीय विधायिका / संसद (Parliament – अनुच्छेद 79)
- गठन: अनुच्छेद 79 के तहत संसद के तीन प्रमुख अंग हैं—राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।
राज्यसभा (उच्च सदन / स्थायी सदन – अनुच्छेद 80)
- संरचना: अधिकतम सदस्य संख्या 250 निर्धारित है (238 राज्यों/UT से निर्वाचित + 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत कला, विज्ञान, साहित्य, समाज सेवा क्षेत्र से)।
- स्थायित्व: यह कभी भंग नहीं होती। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है और प्रत्येक दो वर्ष बाद एक-तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
- योग्यता: न्यूनतम आयु 30 वर्ष।
- पदाधिकारी: उपराष्ट्रपति इसका पदेन सभापति होता है। उपसभापति का चुनाव सदस्य अपने बीच से करते हैं। प्रथम सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।
- सर्वाधिक सीटें: उत्तर प्रदेश (31 सीट)।
लोकसभा (निम्न सदन / अस्थायी सदन – अनुच्छेद 81)
- संरचना: अधिकतम संख्या 550 निर्धारित है (पूर्व में 552 थी, 104वें संशोधन द्वारा 2 एंग्लो-इंडियन का मनोनयन समाप्त कर दिया गया)।
- चुनाव: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव।
- कार्यकाल: सामान्यतः 5 वर्ष (राष्ट्रपति द्वारा समय से पहले भी भंग की जा सकती है)। आपातकाल के दौरान इसे 1 बार में 1 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
- योग्यता: न्यूनतम आयु 25 वर्ष।
- सर्वाधिक सीटें: उत्तर प्रदेश (80), महाराष्ट्र (48), पश्चिम बंगाल (42)।
- पदाधिकारी: लोकसभा के सदस्य अपने बीच से ही एक अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष का चुनाव करते हैं। धन विधेयक का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ही करता है। प्रथम अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे।
संसद संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य
- सत्र अंतराल: दो सत्रों के बीच 6 माह से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए। साधारणतः वर्ष में तीन सत्र होते हैं (बजट सत्र, मानसून सत्र, शीतकालीन सत्र)।
- प्रश्नकाल: सदन की कार्यवाही का पहला घंटा (11 से 12 बजे) प्रश्नकाल कहलाता है।
- शून्यकाल: प्रश्नकाल के तुरंत बाद का समय (12 से 1 बजे) शून्यकाल कहलाता है, जो भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है।
- कोरम (गणपूर्ति): सदन की कार्यवाही चलाने के लिए कुल सदस्य संख्या का 1/10 भाग उपस्थित होना अनिवार्य है।
- संयुक्त अधिवेशन का इतिहास: भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक केवल तीन बार (1961, 1978 और 2002) संयुक्त अधिवेशन बुलाया गया है।
प्रमुख संसदीय समितियां
- लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC): गठन वर्ष 1921। कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)। कार्य: CAG की रिपोर्ट की जांच करना।
- प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): गठन वर्ष 1950 (जॉन मथाई की सिफारिश पर)। कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी सदस्य केवल लोकसभा से होते हैं। कार्य: बजट अनुमानों की जांच करना।
- लोक उद्यम समिति: गठन वर्ष 1964 (कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर)। कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)। कार्य: सरकारी उद्योगों की रिपोर्ट की जांच करना।
11. संघीय न्यायपालिका: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court – अनुच्छेद 124-147)
- प्रकृति: भारत में एकीकृत व स्वतंत्र न्यायपालिका का प्रावधान है। ऐतिहासिक रूप से 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत 1774 में कलकत्ता में तथा भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना हुई थी। वर्तमान सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ।
- नियुक्ति व कार्यकाल: न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कोलेजियम की सलाह पर की जाती है। न्यायाधीशों की अधिकतम सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है।
- वेतन: मुख्य न्यायाधीश का ₹2.8 लाख प्रति माह तथा अन्य न्यायाधीशों का ₹2.5 लाख प्रति माह।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: हीरालाल जे. कानिया।
12. राज्य कार्यपालिका (State Executive – भाग VI)
राज्यपाल (Governor)
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा (एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल भी हो सकता है)। स्रोत: कनाडा का संविधान।
- भूमिका: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करता है।
| राज्यपाल एक नजर में | विवरण |
|---|---|
| पद का उल्लेख | अनुच्छेद 153 |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति द्वारा (केंद्रीय मंत्रीपरिषद की सिफारिश पर) |
| शपथ | संबंधित राज्य के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष |
| इस्तीफा | राष्ट्रपति को |
| कार्यकाल | सामान्यतः 5 वर्ष (या राष्ट्रपति की इच्छा तक) |
| न्यूनतम आयु | 35 वर्ष |
| वर्तमान वेतन | ₹ 3.5 लाख प्रति माह |
राज्यपाल के कार्य एवं शक्तियां
- नियुक्तियां: मुख्यमंत्री, राज्य मंत्रीपरिषद के सदस्य, महाधिवक्ता (Advocate General), राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष आदि की नियुक्ति।
- विश्वविद्यालय: राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति (Chancellor) होता है।
- क्षमादान (अनुच्छेद 161): राज्य सूची के विषयों पर सजा कम या निलंबित कर सकता है, परंतु मृत्युदंड को क्षमा करने या कोर्ट मार्शल की सजा बदलने का अधिकार नहीं है (यह केवल राष्ट्रपति को है)।
- मनोनयन (अनुच्छेद 171): राज्य विधान परिषद (यदि उपलब्ध हो) में कुल सदस्यों का 1/6 भाग मनोनीत करता है।
- अध्यादेश (अनुच्छेद 213): विधानमंडल का सत्र न चलने पर अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
- विधेयक आरक्षित करना (अनुच्छेद 200): राज्य विधानसभा द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रख सकता है।
- अनुच्छेद 356 की सिफारिश: राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश राष्ट्रपति से करता है।
राज्य मंत्रीपरिषद एवं मुख्यमंत्री (अनुच्छेद 163-164)
- अनुच्छेद 163: राज्यपाल को सलाह देने के लिए एक मंत्रीपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा।
- अनुच्छेद 164: मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करेगा।
- योग्यता: विधानमंडल (विधानसभा/विधानपरिषद) का सदस्य होना अनिवार्य है। न्यूनतम आयु 25 वर्ष (यदि विधानसभा सदस्य हो)। कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष।
13. महाधिवक्ता (Advocate General – अनुच्छेद 165)
- संवैधानिक पद: अनुच्छेद 165 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है।
- भूमिका: यह राज्य सरकार का सर्वोच्च कानूनी सलाहकार होता है (जैसे केंद्र में महान्यायवादी होता है)।
- विशेषाधिकार: राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, परंतु मत देने का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 177)।
- कार्यकाल: राज्यपाल के प्रसादपर्यंत। योग्यता हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनने के समान होनी चाहिए।
14. राज्य विधायिका / विधानमंडल (State Legislature – अनुच्छेद 168)
- अंग: अनुच्छेद 168 के अनुसार राज्य विधानमंडल के तीन अंग होते हैं—राज्यपाल, विधान परिषद (उच्च सदन – यदि अस्तित्व में हो) और विधानसभा (निम्न सदन)।
विधानसभा (निम्न सदन / अस्थायी सदन – अनुच्छेद 170)
- इसे जनता का सदन या लोकप्रिय सदन कहा जाता है।
- सदस्य संख्या: अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 हो सकती है (कुछ छोटे राज्य जैसे गोवा, मिजोरम, सिक्किम इसके अपवाद हैं)।
- चुनाव व कार्यकाल: प्रत्यक्ष वयस्क मताधिकार द्वारा जनता द्वारा चुनाव। कार्यकाल 5 वर्ष (राज्यपाल द्वारा समय से पहले भंग संभव)।
- सीटें: सर्वाधिक सीटें उत्तर प्रदेश (403) में हैं।
- आरक्षण (अनुच्छेद 332): अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीटों का आरक्षण।
- योग्यता: न्यूनतम आयु 25 वर्ष।
विधान परिषद (उच्च सदन / स्थायी सदन – अनुच्छेद 169/171)
- यह एक स्थायी सदन है जिसे भंग नहीं किया जा सकता, परंतु अनुच्छेद 169 के तहत संसद इसे पूरी तरह समाप्त (उत्सादित) कर सकती है।
- वर्तमान स्थिति: भारत के केवल 6 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में विधान परिषद कार्यरत है।
- सदस्य संख्या सीमा: राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई (1/3) से अधिक नहीं और न्यूनतम 40 से कम नहीं होनी चाहिए।
- कार्यकाल: इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है तथा प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
- योग्यता: न्यूनतम आयु 30 वर्ष।
1. राज्य न्यायपालिका (State Judiciary )
भारतीय संविधान के भाग-VI (अनुच्छेद 214-232) में राज्यों के उच्च न्यायालयों का प्रावधान है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में सर्वप्रथम 1862 में कलकत्ता, बम्बई और मद्रास में उच्च न्यायालयों की स्थापना हुई थी।
- चौथा उच्च न्यायालय: वर्ष 1866 में इलाहाबाद में स्थापित किया गया था।
- संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 214): प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय (High Court) होगा।
- 7वां संविधान संशोधन, 1956: इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि संसद कानून बनाकर दो या दो से अधिक राज्यों एवं एक संघ राज्य क्षेत्र के लिए एक ही साझा उच्च न्यायालय (Common High Court) स्थापित कर सकती है।
- संख्या: वर्तमान में भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश: एक नजर में
| विवरण | नियम / प्रावधान |
|---|---|
| नियुक्ति | राष्ट्रपति द्वारा (CJI, संबंधित राज्य के राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से) |
| पदच्युत (हटाना) | संसद को (महाभियोग जैसी विशेष प्रक्रिया द्वारा) |
| शपथ | संबंधित राज्य के राज्यपाल के समक्ष |
| इस्तीफा | राष्ट्रपति को |
| कार्यकाल | निर्धारित नहीं है (न्यूनतम कार्यकाल तय नहीं है) |
| अधिकतम आयु | 62 वर्ष (रिटायरमेंट की आयु) |
| वेतन | मुख्य न्यायाधीश को ₹ 2.50 लाख प्रति माह |
- योग्यता: भारत का नागरिक हो, किसी निम्न न्यायालय (Subordinate Court) में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो, या उच्च न्यायालय/विभिन्न न्यायालयों में मिलाकर 10 वर्ष तक वकील रहा हो।
- अधीनस्थ न्यायालय: अनुच्छेद 233-237 के तहत ज़िला न्यायालय और अन्य निम्न न्यायालय उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण व निर्देशन में कार्य करते हैं।
2. स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government )
पंचायती राज (Gram Panchayat)
- जनक: लॉर्ड रिपन को भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक माना जाता है। उनके 1882 के रिपन प्रस्ताव को स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
- नीति निदेशक तत्व: अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के गठन को राज्यों का कर्तव्य बताया गया है (गांधीवादी विचारधारा)।
- बलवंत राय मेहता समिति (जनवरी 1957): इस समिति ने भारत में त्रिस्तरीय (3-Tier) पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी। इन्हें पंचायती राज व्यवस्था का ‘वास्तुकार’ (Architect) माना जाता है।
- शुरुआत: 2 अक्टूबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बागडरी (बांगली) गांव में सबसे पहले त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की थी।
- अशोक मेहता समिति (1977): इस समिति ने द्विस्तरीय (2-Tier) पंचायती राज व्यवस्था का सुझाव दिया था।
- एल.एम. सिंघवी समिति (1986): राजीव गांधी सरकार के समय गठित, जिसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की।
- संवैधानिक मान्यता (73वां संशोधन, 1992): इसके तहत संविधान में भाग-9 तथा अनुच्छेद 243 से 243(O) तक ग्रामीण पंचायती राज को जोड़ा गया।
- भाग-9 में कुल 16 अनुच्छेद हैं।
- इसके लिए 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को कार्य करने के लिए कुल 29 विषय दिए गए हैं।
पंचायती राज से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- पंचायती राज दिवस: प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
- आरक्षण: उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 1/3 (33%) आरक्षण प्राप्त है, जबकि मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में महिलाओं को 1/2 (50%) आरक्षण दिया गया है। आंध्र प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अल्पसंख्यकों को भी पंचायतों में आरक्षण प्राप्त है। अरुणाचल प्रदेश में अनुसूचित जातियों (SC) के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं है।
- अपवाद: मेघालय, मिजोरम तथा नागालैंड में पंचायती राज का गठन नहीं किया गया है (वहां एकस्तरीय जनजातीय परिषदें कार्यरत हैं)।
- जनसंख्या सीमा: जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, वहां मध्यवर्ती स्तर (Block Level) पर पंचायतों का गठन अनिवार्य नहीं है।
- PESA अधिनियम: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के विस्तार के लिए पेसा (PESA) अधिनियम 1996 में बनाया गया था।
- न्यूनतम आयु: पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यह राज्य सूची का विषय है।
- उत्तर प्रदेश पंचायत विधि (संशोधन) विधेयक: वर्ष 1994 में पारित हुआ और 22 अप्रैल 1994 को लागू हुआ।
- प्रथम पंचायत राज मंत्री: स्वतंत्र भारत के पहले पंचायती राज मंत्री सुरेंद्र कुमार डे (S.K. Dey) थे।
नगरपालिका (Municipalities – शहरी स्थानीय स्वशासन)
- इतिहास: अंग्रेजों ने सबसे पहले 1687 में मद्रास में नगर निगम की स्थापना की थी।
- संवैधानिक मान्यता (74वां संशोधन, 1992): इसके तहत संविधान में भाग-9(A) तथा अनुच्छेद 243(P) से 243(ZG) तक नगरपालिकाओं को जोड़ा गया।
- अनुसूची व विषय: इसके लिए 12वीं अनुसूची शामिल की गई, जिसमें शहरी निकायों के लिए कुल 18 विषय निर्धारित हैं।
- कार्यकाल: पंचायतों की भांति प्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष का कार्यकाल होता है। इसमें SC, ST तथा महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हैं।
3. सहकारी समितियां (Co-operative Societies)
- जनक: भारत में सहकारी आंदोलन का जनक एफ. निकोलसन को माना जाता है। इस आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1904 में हुई थी।
- संवैधानिक दर्जा (97वां संशोधन, 2011): इसके द्वारा सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा देते हुए संविधान में भाग-9(B) जोड़ा गया, जो अनुच्छेद 243(ZH) से 243(ZT) तक विस्तृत है।
- नियम: सहकारी समिति में निदेशकों की अधिकतम संख्या 21 हो सकती है, जिसमें कम से कम 1 स्थान SC/ST और 2 स्थान महिला सदस्यों के लिए आरक्षित होते हैं।
- प्रथम सहकारिता मंत्री: भारत के पहले और वर्तमान सहकारिता मंत्री अमित शाह हैं।
4. केंद्र-राज्य संबंध (Center-State Relations)
संविधान के भाग-XI में अनुच्छेद 245-263 तक केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों का विस्तृत उल्लेख है। इन्हें मुख्य रूप से 3 भागों में बांटा जाता है:
- विधायी संबंध: अनुच्छेद 245-255
- प्रशासनिक संबंध: अनुच्छेद 256-263
- वित्तीय संबंध: इसका उल्लेख भाग-XII में किया गया है।
प्रमुख अनुच्छेद एवं शक्तियों का विभाजन
- अनुच्छेद 246: केंद्र और राज्यों के मध्य विधायी शक्तियों के बंटवारे के लिए सातवीं अनुसूची के तहत तीन सूचियों (संघ, राज्य और समवर्ती सूची) का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 246(A): वस्तु एवं सेवा कर (GST) के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 248: विधायी अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers) संसद (केंद्र) में निहित की गई हैं।
- अनुच्छेद 249: यदि राज्यसभा राष्ट्रीय हित में कोई प्रस्ताव पारित कर दे, तो संसद को राज्य सूची के विषय पर 1 वर्ष के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है।
- अनुच्छेद 250: आपातकाल की स्थिति में संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का पूर्ण अधिकार होता है।
- अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संधियों को अमली जामा पहनाने के लिए संसद राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकती है।
- अनुच्छेद 262: संसद को अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के पानी से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन की शक्ति देता है।
- अनुच्छेद 263: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) के गठन का प्रावधान।
- अनुच्छेद 279(A): 101वें संविधान संशोधन (2016) द्वारा जोड़ा गया, जिसके तहत राष्ट्रपति को GST परिषद के गठन की शक्ति दी गई है।
प्रमुख आयोग
- प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966): मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित 6-सदस्यीय निकाय।
- राजमन्नार आयोग (1969): तमिलनाडु सरकार द्वारा डॉ. पी.वी. राजमन्नार की अध्यक्षता में गठित 3-सदस्यीय आयोग।
- सरकारी आयोग (1983): सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर.एस. सरकारीया की अध्यक्षता में गठित। इसने केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए 247 सिफारिशें दी थीं।
- पुंछी आयोग (2007): केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता में गठित 4-सदस्यीय आयोग।
5. संवैधानिक एवं गैर-संवैधानिक निकाय
अ. संवैधानिक निकाय (Constitutional Bodies)
ये वे निकाय हैं जिनका उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेदों में स्पष्ट रूप से किया गया है।
1. वित्त आयोग (Finance Commission – अनुच्छेद 280)
- यह एक अर्ध-न्यायिक और अस्थायी संस्था है, जिसका गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5वें वर्ष में किया जाता है।
- संरचना: इसमें 1 अध्यक्ष सहित कुल 5 सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। इनका कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक होता है।
- मुख्य कार्य: केंद्र और राज्यों के मध्य करों (Taxes) के शुद्ध आगमों का बंटवारा करना।
- इतिहास व वर्तमान: पहले वित्त आयोग के अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे। 15वें वित्त आयोग (2020-2025) के अध्यक्ष नन्द किशोर सिंह (N.K. Singh) हैं।
2. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC – अनुच्छेद 315)
- अनुच्छेद: भाग-XIV के अनुच्छेद 315 में उल्लेख।
- संरचना: 1 अध्यक्ष सहित कुल 11 सदस्य होते हैं। नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा होती है।
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक। यह केंद्र की ग्रेड ‘A’ और ‘B’ सेवाओं के लिए मुख्य भर्ती संस्था है।
- अध्यक्ष: प्रथम अध्यक्ष सर रोज बार्कर थे, प्रथम भारतीय अध्यक्ष एच.के. कृपलानी थे। चार्ट के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष मनोज सोनी हैं।
3. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC – अनुच्छेद 315)
- प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग (जैसे UPPSC, BPSC)।
- संरचना व कार्यकाल: 1 अध्यक्ष सहित कुल 11 सदस्य (राज्यों के अनुसार भिन्न हो सकता है)। नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक होता है। यह राज्य के कार्मिक मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
4. केन्द्रीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – अनुच्छेद 324)
- अनुच्छेद: भाग-XV के अनुच्छेद 324 में वर्णन।
- संरचना: वर्तमान में यह एक बहुसदस्यीय निकाय है जिसमें 1 मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) तथा 2 अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। (1989 में इसे पहली बार बहुसदस्यीय बनाया गया था)।
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।
- अध्यक्ष: चार्ट के अनुसार वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार हैं।
5. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC – अनुच्छेद 338)
- संवैधानिक दर्जा: 89वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा इसे अनुच्छेद 338 के तहत पृथक संवैधानिक दर्जा मिला।
- संरचना व कार्यकाल: 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 3 अन्य सदस्य (नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा)। कार्यकाल 3 वर्ष।
- अध्यक्ष: चार्ट के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष विजय सांपला हैं।
6. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST – अनुच्छेद 338A)
- संवैधानिक दर्जा: 89वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा इसे अनुच्छेद 338(A) के तहत अलग आयोग बनाया गया।
- संरचना व कार्यकाल: 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 3 अन्य सदस्य। कार्यकाल 3 वर्ष।
- अध्यक्ष: चार्ट के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष हर्ष चौहान (अंतर सिंह आर्य) हैं।
7. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC – अनुच्छेद 338B)
- संवैधानिक दर्जा: 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा इसे अनुच्छेद 338(B) के तहत संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।
- संरचना व कार्यकाल: 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 3 सदस्य। कार्यकाल 3 वर्ष।
- अध्यक्ष: चार्ट के अनुसार वर्तमान अध्यक्ष हंसराज गंगाराम अहीर हैं।
ब. गैर-संवैधानिक निकाय (Non-Constitutional / Statutory Bodies)
ये वे संस्थाएं हैं जिनका गठन संसद के अधिनियमों या कार्यपालिका के आदेशों द्वारा किया गया है, संविधान के मूल पाठ में इनका उल्लेख नहीं था।
| निकाय का नाम | गठन वर्ष | कुल सदस्य | सदस्यों का कार्यकाल | प्रमुख / अध्यक्ष (चार्ट के अनुसार) | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) | 1963 | — | — | अनिल कुमार सिन्हा | संथानम समिति की सिफारिश पर |
| केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) | 1964 | 3 | 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु | ए.एस. राजीव | संथानम समिति की सिफारिश पर |
| राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) | 1992 | 6 | 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु | रेखा शर्मा | वैधानिक निकाय |
| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) | 1993 | 6 | 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु | न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा | मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम |
| राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग | 1993 | 7 | 3 वर्ष | इकबाल सिंह लालपुरा | अल्पसंख्यकों के हितों के लिए |
| केन्द्रीय सूचना आयोग (CIC) | 2005 | — | — | हीरालाल सामरिया | RTI अधिनियम 2005 के तहत |
| राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग | 2007 | 7 | 3 वर्ष या 65 वर्ष (अध्यक्ष) | 3 वर्ष या 60 वर्ष (सदस्य) | प्रियंक कानूनगो |
| नीति आयोग (NITI Aayog) | 2015 | — | — | नरेन्द्र मोदी (पदेन अध्यक्ष) | योजना आयोग के स्थान पर गठित कार्यपालिका निकाय |
6. राजभाषा (Official Language – भाग XVII)
- अनुच्छेद सीमा: अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा का प्रावधान है।
- अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
- अनुच्छेद 344: राजभाषा के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा आयोग के गठन का प्रावधान। इसके तहत 1955 में बी.जी. खेर (बाल गंगाधर खेर) की अध्यक्षता में प्रथम राजभाषा आयोग का गठन हुआ था।
- संसदीय समिति: राजभाषा पर संयुक्त संसदीय समिति में कुल 30 सदस्य होते हैं (20 लोकसभा + 10 राज्यसभा)।
- राजभाषा अधिनियम: संसद द्वारा वर्ष 1963 में पारित किया गया।
- संवैधानिक भाषाएं (आठवीं अनुसूची): वर्तमान में इसमें 22 भाषाएं शामिल हैं (मूल संविधान में केवल 14 भाषाएं थीं)।
भाषाओं को जोड़ने का इतिहास:
- 21वां संशोधन, 1967: सिन्धी भाषा को 15वीं भाषा के रूप में जोड़ा गया।
- 71वां संशोधन, 1992: कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली (ट्रिक: नमक) को जोड़ा गया।
- 92वां संशोधन, 2003: बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली (ट्रिक: BDMS) को शामिल किया गया।
- हिंदी दिवस: 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संवैधानिक रूप से राजभाषा स्वीकार किया गया, इसलिए प्रतिवर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है।
- अनुच्छेद 348: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) और उच्च न्यायालयों (High Court) में प्रयोग की जाने वाली भाषा (अंग्रेजी) का उल्लेख।
- अनुच्छेद 350(A): प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने की सुविधाएं।
- अनुच्छेद 351: हिंदी भाषा के विकास और प्रसार के लिए केंद्र सरकार के निर्देश।
7. आपातकालीन उपबंध (Emergency Provisions – भाग XVIII)
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 352 से 360 तक तीन प्रकार के आपातकाल का प्रावधान है। आपातकालीन शक्तियां पूर्णतः राष्ट्रपति में निहित होती हैं।
आपातकाल के तीन प्रकार:
- राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352):
- आधार: युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के समय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा घोषणा।
- विशेष संशोधन: मूल संविधान में ‘सशस्त्र विद्रोह’ के स्थान पर ‘आंतरिक अशांति’ शब्द था, जिसे 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा हटा दिया गया।
- इतिहास: भारत में अब तक कुल तीन बार (1962: भारत-चीन युद्ध, 1971: भारत-पाक युद्ध, 1975: आंतरिक अशांति के आधार पर) राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया जा चुका है।
- प्रभाव (अनुच्छेद 359): राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य सभी मौलिक अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं।
- राष्ट्रपति शासन / राज्यों में आपातकाल (अनुच्छेद 356):
- आधार: जब किसी राज्य का संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तो राज्यपाल की सिफारिश पर राष्ट्रपति वहां राष्ट्रपति शासन लगाता है।
- अवधि: इसे एक बार में अधिकतम 6 माह तक और विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष तक लागू रखा जा सकता है।
- रिकॉर्ड: सर्वाधिक बार राष्ट्रपति शासन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल (49 बार) में लगा है। राज्यों में सर्वाधिक बार उत्तर प्रदेश (10) और मणिपुर (10) में लगा है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां आज तक कभी भी राष्ट्रपति शासन नहीं लगा है।
- वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360):
- आधार: जब देश की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा हो, तब केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर लगाया जाता है।
- अवधि: इसे 1 बार में अधिकतम 6 माह तक तथा संसद की मंजूरी से अनिश्चित काल तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें न्यूनतम अवधि 2 माह निर्धारित है।
- वर्तमान स्थिति: भारत में अब तक एक बार भी वित्तीय आपातकाल नहीं लगा है।
8. संविधान संशोधन प्रक्रिया (Amendment Process – भाग XX)
- अनुच्छेद व स्रोत: अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है। यह प्रक्रिया दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गई है।
- संशोधन के प्रकार: संविधान में 3 प्रकार से संशोधन किया जा सकता है:
- साधारण बहुमत द्वारा: संसद के सामान्य बहुमत से।
- विशेष बहुमत द्वारा: सदनों के कुल बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से।
- विशेष बहुमत एवं राज्यों के अनुमोदन द्वारा: विशेष बहुमत के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी।
- नियम: संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है। इसमें दोनों सदनों को बराबर की शक्तियां प्राप्त हैं और दोनों सदनों के मध्य गतिरोध होने पर संयुक्त अधिवेशन (Joint Session) का प्रावधान नहीं है।
9. महत्वपूर्ण संविधान संशोधनों की सूची
- 1ला संशोधन, 1951: संविधान में 9वीं अनुसूची जोड़ी गई (भूमि सुधार कानून)।
- 7वां संशोधन, 1956: भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन करके 14 राज्य और 6 केंद्रशासित प्रदेश बनाए गए। साझा उच्च न्यायालय का प्रावधान किया गया।
- 10वां संशोधन, 1961: दादरा और नगर हवेली को भारतीय संघ में शामिल किया गया।
- 12वां संशोधन, 1962: गोवा, दमन और दीव को भारतीय संघ में शामिल किया गया।
- 14वां संशोधन, 1962: पुडुचेरी को भारतीय संघ में शामिल किया गया।
- 18वां संशोधन, 1966: पंजाब राज्य का पुनर्गठन कर हरियाणा राज्य और चंडीगढ़ (UT) बनाया गया।
- 21वां संशोधन, 1967: 8वीं अनुसूची में सिन्धी भाषा को जोड़ा गया।
- 24वां संशोधन, 1971: संसद को मौलिक अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग में संशोधन करने का अधिकार दिया गया।
- 36वां संशोधन, 1975: सिक्किम को पूर्ण राज्य (22वां राज्य) का दर्जा दिया गया।
- 42वां संशोधन, 1976 (लघु संविधान / Mini Constitution):
- प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए।
- भाग-IVA के तहत 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए।
- लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल 5 से बढ़ाकर 6 वर्ष किया गया (जिसे बाद में पुनः 5 वर्ष कर दिया गया)।
- शिक्षा, वन, वन्यजीव, जनसंख्या नियंत्रण आदि विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची में डाला गया।
- राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्य किया गया।
- 44वां संशोधन, 1978:
- लोकसभा/विधानसभा का कार्यकाल पुनः 5 वर्ष किया गया।
- ‘आंतरिक अशांति’ के स्थान पर ‘सशस्त्र विद्रोह’ शब्द जोड़ा गया।
- संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया।
- अनुच्छेद 20 और 21 को आपातकाल में भी निलंबित न करने का प्रावधान किया गया।
- 52वां संशोधन, 1985: संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़कर दल-बदल विरोधी कानून लागू किया गया।
- 56वां संशोधन, 1987: गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया (दमन व दीव केंद्रशासित प्रदेश बने रहे)।
- 61वां संशोधन, 1989: अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
- 69वां संशोधन, 1992: दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का दर्जा दिया गया तथा वहां विधानसभा का प्रावधान हुआ।
- 71वां संशोधन, 1992: 8वीं अनुसूची में कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाएं जोड़ी गईं।
- 73वां संशोधन, 1992: ग्रामीण पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा (9वीं भाग और 11वीं अनुसूची)।
- 74वां संशोधन, 1992: शहरी नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा (9A भाग और 12वीं अनुसूची)।
- 84वां संशोधन, 2001: 1991 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन की अनुमति (2026 तक सीटों की संख्या स्थिर)।
- 86वां संशोधन, 2003 (2002): प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) बनाया गया तथा 11वां मूल कर्तव्य जोड़ा गया।
- 91वां संशोधन, 2003: मंत्रीपरिषद का आकार लोकसभा/विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का अधिकतम 15% निर्धारित किया गया।
- 92वां संशोधन, 2003: 8वीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाएं जोड़ी गईं।
- 93वां संशोधन, 2006: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में 27% आरक्षण।
- 99वां संशोधन, 2015: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) का गठन (जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया)।
- 100वां संशोधन, 2015: भारत और बांग्लादेश के मध्य भूमि सीमा समझौता (Land Boundary Agreement)।
- 101वां संशोधन, 2016: वस्तु एवं सेवा कर (GST) को संवैधानिक मान्यता।
- 102वां संशोधन, 2018: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा।
- 103वां संशोधन, 2019: सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण (EWS)।
- 104वां संशोधन, 2020: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC/ST की सीटों के आरक्षण को 10 वर्षों के लिए बढ़ाया गया तथा आंग्ल-भारतीयों (Anglo-Indians) के मनोनयन को समाप्त कर दिया गया।
- 105वां संशोधन, 2021: राज्यों को अपनी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) की सूची की पहचान करने और उसे बनाए रखने की शक्ति को बहाल किया गया।
भारतीय संविधान हमारे देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है। यह हमें समान अधिकार, न्याय और सम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। संविधान का सम्मान करना, उसके मूल्यों को समझना और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाना प्रत्येक भारतीय की जिम्मेदारी है।